जब जिंदगी कोफ़्त बन जाती है , तब हम “मैं ही क्यूँ ” का सवाल पूछने लग जाते है| जीने की आशा ही मर सी जाती है | लोगो की सांतवाना बहुत बेबस मेहसूस कराती है, कि क्या हम इतने असहाय हो गए हैं कि खुद को संभाल नहीं सकते? जिंदगी बहुत क्रूर हो गई है और हम लाचार से हो गए है| इस हद तक खोखला सा हो गया है कि एक छोटे से कीड़े के जाने पर आँसू आ जाते है| बस इन्तेज़ार है और विनती है जिंदगी से थोड़ा नर्म हो जाने की 🙏@surbhisays

देख लिया लोगों का “दबदबा” ,

देख लिया लोगों की झूठी “ऊंची पहचान”,

आज मुश्किल समय में सिर्फ साथ मांगा तो,उन्होंने पूछना ही बंद कर दिया !

बिनती है ,

कभी न बयान कर अपने गम,

हमारे दुख हमारे कर्म,

लोग दुख सुन कर फैसला कर देंगे,

लेकिन सुकून में रहना क्यूँकी,

वही बिगड़ता है तो वही संभालता है | surbhisays

ईमानदारी का ताज़ पहने ,

बिन गलतियों के धिक्कार सहते ,

मौन हो गई हूँ |

जटिल है यह जीवन,

जहाँ हर इंसान   ,

चुभा रहा कठोरता , आजीवन |

फिर भी,

मैदान-ए-जंग में निकल तो पड़े है ,

ना कोई सहारा, ना कोई संगी है।

बस तेरी ही आस है,  हे ज़िंदगी ।

नयी राह और अकेलापन, यही तेरा उसूल है  |@surbhisays

कल की गोधूलि बेला की “मैं” आज के भोर की “कौन ” हो गई ,

वो हँसती  खिलखिलाती हुई “मैं” आज उन आवाज़ो में मौन हो गई | @surbhisays

A heavy feel on breath..

A heavy feel on eyes..

A heavy feel on heart…

Body odours like a carcass..

Walking down the street..

Dehydrated!

A dead plant too needs water to gain life..

where’s the gardener? ( a help)

where’s the sunshine? ( a hope)

where’s the love? ( a motivation)

where’s life? ( water)

it was far far away!

FAITH. pursued!

and it rained !!

Back to life…

TRUST GOD , HE WILL NEVER UPSET YOU! @surbhisays

इन्तेज़ार है की कोई इस वास्तविकता को कबूल करे ,

की दिल की सुंदरता देखना प्रकृति का असूल है ,

चेहरा और शरीर तो बस जल्दबाजी का चारा है ,

बदलते ही सबने इसको नकारा है ,

दिल की सुंदरता किसी के मोहताज नहीं ,

सदेव एक जैसा रहना , इस पर उंगली उठाना , ऐसे किसी की औकात नहीं । @surbhisays

बड़ी हलचल है मंज़िलों में, 
जैसे खो गया है कारवाँ
वो चकाचौंध होते साहिलों में
घुटती कला ,
जैसे एक से होते हज़ारवाँ। @surbhisays

अनंत है यह आसमाँ,
किधर दर्द साँझा करूँ?
हुई है नम आँखों की शीत प्रवाह,
बता किधर इस विरह की बौछार करूँ?
हुआ है घरौंदा तबाह मेरा ,
“तपिश की धारा” हृदय तेरा ,
बता इस नाइंसाफी का मैं क्या करूँ? @surbhisays

कष्ट का रास्ता ,

रास्ता कहाँ ? पगडंडी है काँटों सनी

वो कीड़े – मकोड़े , घनघोर अंधेरा ,

रोशनी निगल , अमावस्या घनी

मंज़िल का चौराहा ,

चौराहा कहाँ ? भ्रमण है उलझनों भरी

वो कांपते पाँव , बेचैनी अटकन ,

कुछ नहीं बस है ये सफलता की लड़ी । @surbhisays